पूर्वी अफ्रीकी हाइलैंड्स सोमाली जेट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो भारतीय ग्रीष्म मानसून को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। इसके साथ - साथ, अफ्रीकी क्षेत्रों पर किए गए अवलोकन अपर्याप्त हैं और इन क्षेत्रों की कोई अतिरिक्त जानकारी लाभप्रद होगी, चूंकि वर्ष के अधिक समय के दौरान अफ्रीकी क्षेत्र से हवा भारत में बहती है। इसके अतिरिक्त, भारत द्वारा कई नौबंध तैनात किए गए है जो अरब सागर के ऊपर अवलोकन प्रदान करते हैं। यह प्रस्ताव किया गया है कि भारतीय वैज्ञानिक न केवल भारत बल्कि अफ्रीका पर भी इन हाइलैंड्स की भूमिका निर्धारित करने और मध्यम अवधि की भविष्यवाणियों में सुधार लाने का काम करेंगे। उपरोक्त को देखते हुए, भारत सरकार अफ्रीकी देश में क्षमता निर्माण करने के लिए, पूर्वी अफ्रीका में एक संयुक्त भारत अफ्रीकी मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे उन्हें संपूर्ण मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को समझने और अपनाने में मदद मिलेगी। यह न केवल दोनों देशों के लिए ही फायदेमंद होगा, बल्कि यह 3-10 दिन पहले से मौसम पूर्वानुमान और उत्पाद को समझने, सृजन और प्रसारण में अफ्रीकी देशों की क्षमता को बढाएगा ।
जानकारी, अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से और संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाकर, धारणीय विकास को सहायता देने के लिए मौसम में आए उत्तार-चढ़ाव के प्रभावों को समझने, अनुमान लगाने और प्रबंधन में अफ्रीकी देशों की क्षमताओं में वृद्धि के लक्ष्य के साथ: 3 से 10 दिन पहले मौसम पूर्वानुमान और उत्पादों के सृजन और प्रसारण के लिए अफ्रीका में संपूर्ण मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को कार्यान्वित करते हुए अफ्रीकी देशों की क्षमता बढ़ाना ।
राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नोएडा।
भारत-अफ्रीका मंच भारत-अफ्रीका मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के स्थान और शासन के तंत्र का निर्णय लेगा। यह माना गया है कि जो देश केंद्र की मेजबानी करेगा वह केंद्र के लिए भूमि और भवन उपलब्ध करवाएगा और आवर्ती लागत के लिए बजट को पूरा करेगा। यह प्रस्ताव है कि केंद्र अफ्रीका के पूर्वी तट के निकट स्थित हो क्योंकि इस क्षेत्र से हवा का प्रवाह अरब सागर के माध्यम से सीधे भारत में आता है। इसके अतिरिक्त यह भारत द्वारा तैनात किए गए नौबंधों के साथ निकटता सुनिश्चित करेगा हैं, जो कि अरब सागर के ऊपर अवलोकन सृजित करते है। सोमाली जेट के विकास में पूर्वी अफ्रीकी हाइलैंड्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है (भारतीय ग्रीष्म मानसून का एक महत्वपूर्ण घटक)। भारतीय वैज्ञानिकों इन हाइलैंड्स की भूमिका पर कार्य और परिमाण निर्धारित करने और न केवल भारत बल्कि अफ्रीका पर मध्यम अवधि पूर्वानुमान में सुधार करने में सक्षम होंगे । पूर्वी अफ्रीका में नैरोबी (केन्या) और अदीस अबाबा (इथियोपिया) को ऐसी सुविधा की मेजबानी देने पर विचार किया जा सकता है। पूर्वी अफ्रीका के देशों में कुछ पैन-अफ्रीकी और अंतरराष्ट्रीय केंद्र जैसे अफ्रीकी संघ का मुख्यालय अदीस अबाबा में स्थित है, नैरोबी में विकास पर अंतर सरकारी प्राधिकरण (आईजीएडी) - मौसम पूर्वानुमान अनुप्रयोग केंद्र (आईसीपीएसी) स्थित है। यूएनईपी का मुख्यालय भी नैरोबी में स्थित है। यदि प्रस्तावित केंद्र पूर्वी अफ्रीका के किसी भी देश में स्थित होगा तो भारत की पूर्वी अफ्रीका से निकटता अतिरिक्त लाभदायक होगी ।
क्षमता निर्माण के साथ अफ्रीका में मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान के लिए एक संपूर्ण केंद्र की स्थापना ।
(करोड़ रु)
| योजना का नाम | 2012-13 | 2013-14 | 2014-15 | 2015-16 | 2016-17 | कुल |
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| अफ्रीका केंद्र | 10.00 | 20.00 | 80.00 | 40.00 | 30.00 | 180.00 |
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Last Updated On 06/08/2015 - 10:31 |