प्रचालनात्म क मौसम-विज्ञान में प्रशिक्षण

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1875 से आईएमडी भारत सरकार की मौसम संबंधी सेवाओं के लिए परिचालन एजेंसी है। औपचारिक प्रशिक्षण की जरूरत 1946 से ही महसूस की गई कि जब आईएमडी के प्रशिक्षण प्रभाग ने कार्य करना शुरू किया। इस प्रक्रिया में आईएमडी के भीतर देश भर से और साथ ही प्रयोक्ताओं की एक बड़ी संख्या को प्रशिक्षण दिया गया। 1986 में इसे डब्ल्यूएमओ द्वारा अफ्रीका और एशिया के लिए एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में घोषित किया गया था और इसने विदेशी कर्मियों को प्रशिक्षण देना भी शुरू किया।

आईएमडी परिचालन प्रणाली के आधुनिकीकरण से डिजिटल रूप से प्रबंधित और पारस्परिक रूप से अवलोकन, प्रसंस्करण और एकीकृत संचार प्रणालियां प्राप्‍त हुई है। इस परिदृश्य में लाभ पाने के लिए प्रशिक्षण संस्कृति में अनिवार्य रूप से एक बदलाव की जरूरत है, जिसमें जानकारी और कौशल में लगातार वृद्धि, पर्याप्‍त मात्रा में स्वयं और निर्देशित अधिगम और उत्कृष्ट पुस्तकालय, प्रयोगशाला और छात्रावास सुविधाएं शामिल है। इस कार्यक्रम के प्रस्ताव अनिवार्य रूप से आवर्धन करने वाले और मौजूदा सुविधाओं का एकीकरण करने वाले हैं। प्रस्तावित कोर संकाय वर्तमान में आईएमडी के अन्य कार्यालयों से तैनात कर्मियों से एक मामूली वृद्धि है।

भारत ने पहले से ही इस क्षेत्र के लिए जलवायु सेवाओं को विकसित करने के लिए पड़ोसी देशों को साथ लाना शुरू कर दिया है। कई अन्य देश हमारी नई नीतियों और प्रभावशाली बुनियादी ढांचे के कारण नेतृत्व के लिए भारत की ओर आशा रखते हैं। हम इन कई देशों की प्रशिक्षण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अध्‍येतावृत्तियों देते हुए ज्यादा लाभ पाने के इच्‍छुक हैं।

क) उद्देश्‍य:

  1. आईएमडी, अन्य सरकारी और विदेशी मौसम संबंधी संगठनों के एस एंड टी परिचालन कर्मियों के लिए एक व्यापक और लगातार विकसित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थापित करना ।
  2. कर्मियों के कैरियर के दौरान सभी चरणों और स्तरों में 'सतत शिक्षा' की एक प्रणाली को सक्षम बनाने हेतु बुनियादी ढांचे और सामग्री को बनाना।
  3. आईसीएओ और/या अन्‍य निकाय की आवश्यकताओं के अनुसार उदाहरण विमानन मौसम विज्ञान आदि में लाइसेंसिएट पाठ्यक्रम संचालित करना । 
  4. अन्य संगठनों के साथ सहयोग करके शिक्षण संसाधन आधार को व्यापक बनाना और ई-अधिगम सुविधाओं की स्थापना।
  5. अनुप्रयुक्त अनुसंधान उत्पादन को प्रोत्साहित करना, दस्तावेज़ बनाना और निगरानी करना ।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं:

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, दिल्ली।

ग) कार्यान्‍वयन योजना :

  1. आधुनिक शिक्षण साधनों और छात्रावास की सुविधा के साथ प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना।
  2. भारतीय संदर्भ में और प्रशिक्षण के लिए भारत पर निर्भर दक्षिण एशिया और अफ्रीका के संदर्भ में क्षमता निर्माण (10 विदेशी फैलोशिप)।
  3. आई आई टी एम, विश्वविद्यालयों और डब्ल्यूएमओ के साथ लिंक कर नए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  4. प्रशिक्षण संकाय के विकास - कोर संकाय के लिए अतिरिक्त पदों का सृजन
  5. पुणे, दिल्ली और कोलकाता और चेन्नई में 2 क्षेत्रीय केंद्रों में बुनियादी ढांचे का विकास

निम्न बुनियादी ढांचे का प्रस्ताव है:

  • प्रशिक्षण केंद्र, पुणे (8000 वर्गफुट) और एक नए अंतरराष्ट्रीय छात्रावास विंग (30 सीटर) में एनेक्‍सी भवन का निर्माण।
  • पुणे में मौजूदा प्रशिक्षु छात्रावास की मरम्मत।
  • दिल्ली में नए छात्रावास एवं प्रशिक्षण भवन
  • राष्ट्रीय मौसम विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्र, पुणे और दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता में स्‍थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में शिक्षण और छात्रावास मूलभूत सुविधाओं का आधुनिकीकरण और आवर्धन।
  • ई-लर्निंग प्रशिक्षण पोर्टल
  • विदेशी मुद्रा घटक सहित बजट की आवश्यकता

घ) वितरण योग्‍य :

  1. राष्ट्रीय मौसम सेवा के परिचालन की जरूरत की आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति।
  2. प्रौद्योगिकी के मामले में विश्व स्तरीय बुनियादी सुविधाओं की स्थापना और मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए सामग्री।
  3. हाल ही में आईसीएओ / डब्ल्यूएमओ के दिशानिर्देशों के अनुसार विमानन मौसम विज्ञान के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रमों की स्थापना।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 99 करोड़

(करोड़ रु)

बजट आवश्‍यकता

 
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
प्रचालनात्मक मौसम विज्ञान में प्रशिक्षण 15.00 41.00 25.00 8.00 10.00 99.00

 

Last Updated On 06/08/2015 - 13:01
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