दक्षिणी महासागर अध्यनयन

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समुद्र वैज्ञानिकप्रक्रियाओंको बेहतर ढंग सेसमझने के लिएदक्षिणी महासागरमें पांचबहुविषयक जलयात्राएं प्रारंभ की गई।

इनअभियानों के दौरानअध्ययन केफोकसक्षेत्रों में समुद्र विज्ञान औरहाइड्रोग्राफी(2009अभियान के दौरान), जैवभूरसायन विज्ञान औरपुरा-जलवायु विज्ञान (2010)औरप्लवकगतिशीलता(2011) शामिलथे। इनअभियानोंके दौरान किए गएअध्ययन केमुख्यपरिणामों में से कुछनीचे दिए गए हैं :

  • 2011 मेंउपोष्णकटिबंधीयफ्रंटमें एक अनियमितवार्मिंग प्रवृत्ति देखी गई।
  • ध्रुवीयफ्रंटके उत्तरी औरदक्षिणीभागोंमेंस्थानिक और कालिकविविधताएं।
  • पीएफके भीतरविभिन्न स्तरोंपर परिचालितवेब भोजनके विभिन्न प्रकारों के कारणक्लोरोफिलवितरण मेंविविधताएंदेखी गई।
  • निम्नाक्लोरोफिलके लिए जिम्मेदारपादप प्लवकसमुदायपर कोपपोड और सैल्प्द्वाराउच्चग्रजिंग दबाव।
  • विशेष रूप से पोषक तत्वोंनाइट्रेटऔरसिलिकेट कीदक्षिणीअक्षांशके प्रतिवृद्धिदिखानेकी प्रवृत्ति।
  • माध्यमिकउत्पादनपैटर्न औरविविधता विभिन्नफ्रंटोंऔरक्षेत्रोंमें अंतरचिह्नितकरती है।
  • पहली बार स्वप-स्थामने प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए दक्षिणीमहासागर के भारतीय क्षेत्रसे संवेदी और गुप्तऊष्मा के वायु समुद्री फ्लक्सप का अनुमान लगाया गया।

दक्षिणीअक्षांशके ऊपर बह रहीमजबूत सतहीहवाओं के कारणअध्ययनक्षेत्रमेंफ्लक्सवकेवायुसमुद्रहस्तांतरणमें वृद्धि हुई।

Last Updated On 06/11/2018 - 15:17
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