पृथ्वी् प्रणाली विज्ञान में आर एंड डी

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सामाजिक लाभ के लिए पृथ्वी, ध्रुवीय सागर और वायुमंडलीय विज्ञान में देश की विभिन्न सेवाओं में सुधार की ओर केंद्रित अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए, 15 परियोजनाओं को सहायता प्रदान की गई। पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ाने के उद्देश्‍य से, एमओईएस अध्यक्ष प्रोफेसर (आईआईटी दिल्ली, एनजीआरआई हैदराबाद, आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर) और एमओईएस उत्कृष्ट युवा संकाय (आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर) की स्थापना की गई  ।

एम.टेक / पीएचडी (आईआईटी दिल्ली, आईआईएससी बैंगलोर, आईआईटी चेन्नई) जैसे अनेक शैक्षणिक कार्यक्रमों को शुरू किया गया है। विभिन्न शोधकर्ताओं और संस्थानों द्वारा उपयोग हेतु आईयूएसी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, दिल्ली में विशेष प्रयोगशालाओं (आईआईएसईआर कोलकाता में लेजर डायमंड एनविल सेल) त्वरित मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एएमएस) माप सुविधा; सीईएसएस, तिरुवनंतपुरम में द्रव समावेशन  तरीकों का उपयोग करते हुए तेल की खोज के लिए रमन स्पेक्ट्रोमीटर को राष्ट्रीय सुविधा के रूप में स्थापित किया गया।

संयुक्त विकासात्‍मक कार्य के माध्यम से स्वदेशी क्षमता को प्रोत्साहित करने के लिए, एमओईएस सूक्ष्म शैवाल से मेसोस्केल मॉडलिंग और जैव ईंधन(एनएमआईटीएलआई (सीएसआईआर))  और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान  के कम्प्यूटेशनल पहलुओं(सी-डैक, डीआईटी) के क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए 50 प्रतिशत वित्त पोषण प्रदान कर रहा है।

एमओईएस, भारतीय मौसम विज्ञान सेवाओं को अन्य विकसित देशों के बराबर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत विकास कार्य भी करता है। क्रमशः मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए तकनीकी ज्ञान, संसाधनों, पृथ्वी प्रेक्षणों और पृथ्वी विज्ञान; जल चक्र परिवर्तन; और पृथ्वी विज्ञान एवं सेवाओं का आदान-प्रदान करने के लिए यूनाइटेड किंगडम मौसम विज्ञान कार्यालय (यूके), एनओएए (यूएसए), प्राकृतिक पर्यावरण अनुसंधान परिषद (यूके), कोरियाई मौसम विज्ञान प्रशासन (रिपब्लिक ऑफ कोरिया) केएमए के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

सेवाओं के प्रभाव और आर्थिक लाभ का आकलन करने के लिए कृषि मौसम परामर्शी सेवा और मत्स्य सेवा का एक विस्तृत अध्ययन किया गया था।

निम्‍नलिखित नौ ओएएसटीसी (महासागर और वायुमंडलीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ) अनुसंधान के परिभाषित क्षेत्रों के साथ वर्तमान में कार्य कर रहे हैं :

  1. अन्नामलाई विश्वविद्यालय में समुद्री जीव विज्ञान,
  2. गोवा विश्वविद्यालय में समुद्री सूक्ष्म जीव विज्ञान,
  3. बहरामपुर में समुद्री तटीय पारिस्थितिकी
  4. भावनगर विश्वविद्यालय में समुद्री तटीय पारिस्थितिकी
  5. तमिल विश्वविद्यालय में समुद्र तट स्थान
  6. मैंगलौर विश्वविद्यालय में समुद्री भूविज्ञान और भूभौतिकी
  7. आंध्र विश्वविद्यालय में तटीय समुद्री संवर्धन प्रणालियां
  8. कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में समुद्री नितलस्‍थ जीव और
  9. आईआईटी, खड़गपुर में समुद्र इंजीनियरिंग और अंर्तजलीय रोबोटिक्स

कुल 103 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और लगभग 70 परियोजनाएं केन्द्रों में चल रही हैं। 111 पीएच.डी, 13 एम. फिल और 5 एम एस डिग्री प्रदान की गई। 204 शोध पत्रों को पीयर समीक्षा पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है। डॉ ए. ई. मुथुनायागाम, पूर्व सचिव, महासागर विकास विभाग की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय मूल्यांकन समिति का गठन किया गया ताकि स्‍थापना के बाद से ओएएसटीसी के कार्य निष्‍पादन का मूल्यांकन किया जा सके। समिति ने कार्यक्रम के क्षेत्र का विस्तार और केन्द्रों की उत्पादकता और आउटपुट  में सुधार संबंधी सुझावों को अपनी रिपोर्ट को प्रस्तुत किया है। इसमें नए ओएएसटीसी खोलने का भी प्रस्ताव है।

एमओईएस द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं से प्राप्‍त अनुसंधान आउटपुटों की सुलभता को  बढ़ाने के लिए, एक खुली पहुँच वाली डिजिटल रिपोजिटरी स्थापित की गई है। रिपोजिटरी की मेजबानी और रख-रखाव इंकॉइस, हैदराबाद द्वारा किया जाता है। मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं से प्राप्‍त अनुसंधान आउटपुटों / शोध पत्रों को रिपॉजिटरी में अपलोड किया गया, जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया भर में अभिगम्‍य है।

पूर्ण टेक्‍स्‍ट डेटा बेस-साइंस डाईरेक्‍ट और सार संक्षेपण और अनुक्रमण डेटाबेस-स्‍कोपस तक ऑनलाइन पहुच प्रदान करने के लिए एमओईएस संस्‍थानों का एक संघ स्‍थापित किया गया।

Last Updated On 11/19/2015 - 16:37
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