उच्चप विभेदन गौण आयनीकरण मास स्पैदक्ट्रो मीटरी की नई सुविधा (एचआर-एसआईएमएस)

Print

उन आधारभूत भू-रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए माइक्रोमीटर स्‍केल पर सूक्ष्‍म बहुतापीय समस्‍थानिक विश्‍लेषण को समझना आवश्‍यक है जो सामान्‍यतया सबमाइक्रोन स्‍केल पर आयनिक विसरण द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। पारं‍परिक समस्‍थानिक विश्‍लेषण की तुलना में एसआईएमएस इंस्‍ट्रमेंटेशन (विन्‍यास) में किए गए विकास में सक्षम आयन संचरण और उच्‍च द्रव्‍य रिजोल्‍यूशन शामिल है जो कि ठोस नमूनों में सीधे-सीधे चयनात्‍मक विश्‍लेषण पर ~1 माइक्रोमीटर तक उच्‍च स्‍थानिक रिजोल्‍यूशन वाले सूक्ष्‍म स्‍वस्‍थाने समस्‍थानिक अनुपात माप कर सकता है। अब इस तकनीक से वस्‍तुत: समग्र समस्‍थानिक आवर्त सारणी का स्‍वस्‍थाने समस्‍थानिक विश्‍लेषण अप्रत्‍याशित सूक्ष्‍मता और तीव्रता से किया जा सकता है। इन विकासों द्वारा वस्‍तुत: 'तारों में जीवन तक' (स्‍टार्स टू लाइफ) सभी विषयों में समस्थानिक भू रसायन के आयाम और अनुप्रयोग को काफी बढ़ा दिया है।

इस संदर्भ में, यह प्रस्‍तावित है कि पृथ्‍वी, वायुमंडलीय, समुद्रीय और ग्रहीय विज्ञान से संबंधित समस्‍थानिक भू रसायन और भू-कालक्रम में समकालिक नवीनतम अनुसंधान हेतु हाई रिजोल्‍यूशन सेकेंडरी आयोजनाइजेशन मास स्‍पेक्‍ट्रोमीट्रो हेतु राष्‍ट्रीय सुविधा केंद्र की स्‍थापना की जाए। य‍ह केंद्र बहु-तत्‍वीय समस्‍थानिक भू-रसायन और भू-कालक्रम के क्षेत्रों में अनुसंधान के कई नए क्षेत्रों, जो कि वर्तमान में विश्‍व भर में आधारभूत और अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी है; को सहायता प्रदान करेगा। इस सुविधा केंद्र द्वारा निम्‍नलिखित कुछ वैज्ञानिक प्रश्‍नों का समाधान किया जा सकेगा:

  1. मैग्‍मीय, कायंतरित, अवसादी और डायजेनेटिक प्रक्रियाओं से संबंधित जटिल विकास संबंधी इतिहास को जानने के लिए जरकान और कई अन्‍य सहायक खनिजों की उच्‍च स्‍थानिक रिजोल्‍यूशन पर यू-पीबी डेटिंग।
  2. विभिन्‍न प्रकार के अयस्‍क निक्षेपों के मैटोलोजेनी और फिंगर प्रिटिंग के मूलभूत मुद्दों का समाधान करना।
  3. प्रवालों, स्‍पीलियोथेम्‍स इत्‍यादि में विकास परतों के त्‍वरित विश्‍लेषण के द्वारा पुराजलवायु के विषयों के अनुकूल स्‍वस्‍थाने स्थिर समस्‍थानिक भू रसायन जैसे सी,ओ,एस,एन।
  4. अवसादी बेसिनों की क्रोनोस्‍ट्रेटिग्राफी।
  5. भारतीय अयस्‍क निक्षेपों के सल्‍फर और ऑक्‍सीजन समस्‍थानिक संरचानाओं का स्‍वस्‍थाने अध्‍ययन।
  6. हीरों में अंत:स्‍थ पिण्‍डों की समस्‍थानिक विश्‍लेषण में गहन पृथ्‍वी प्रतिक्रियाएं।
  7. भारतीय महासागर रिज के बेसाल्टिक ग्‍लाइसेज में ज्‍वलनशील सामग्री और हेलोजन समस्‍थानिक का रसायन ।
  8. अंतरिक्ष रसायन से संबंधित स्थिर समस्‍थानिक अध्‍ययन।

भारतीय पृथ्‍वी और ग्रहीय वैज्ञानिक समस्‍थानिक भू-रसायन में विशेषकर एएसआई-संवेदी उच्‍च  रिजोल्‍यूशन आयन माइक्रो जांच (एसएचआरआईएमपी) या कमेका-आईएमएस 1280 एचआर एसआईएमएस जैसे विन्‍यास के प्रयोग से उन्‍नत अनुसंधान करने के लिए अधिकतर विदेशी प्रयोगशालाओं पर निर्भर करते हैं। यद्यपि पिछले दशक में चीन सहित विश्‍व भर में 40 ऐसे सुविधा केंद्र स्‍थापित किए गए, तथापि अभी यह नई प्रौद्योगिकी भारत में नहीं पहुंची है।

यह उल्‍लेखनीय है कि भारतीय अनुसंधान संस्‍थान ऐसे सुविधा केंद्र की स्‍थापना करने में सक्षम हैं। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद में पारंपरिक एसआईएसएम और नैनो-एसआईएमएस प्रयोगशालाएं प्रचालनरत हैं । हाल ही में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौ‍द्योगिकी विभाग के आंशिक सहयोग से राष्‍ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्‍थान (सीएसआईआर-एनजीआरआई) में एक नया स्‍वस्‍थाने समस्‍थानिक विश्‍लेषण केंद्र (एलएएम-एमसी-आईसीपीएमएस) की स्‍थापना की गई है। नए राष्‍ट्रीय केंद्र समस्‍थानिक भू-रसायन और भू-कालक्रम के उत्‍कृष्‍टता केंद्र के रूप में कार्य करेगा और यह न केवल उन्‍नत अनुसंधान अपितु पृथ्‍वी, वायुमंडलीय, महासागरीय और ग्रहीय विज्ञान के क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट मानव संसाधन उपलब्‍ध कराने हेतु भी अपार संभावनाएं उपलब्‍ध कराएगा।

क) उद्देश्‍य :

  1. जरकॉन की स्‍वस्‍थाने यू-पीबी डेटिंग करना और इंडियन शील्‍ड की महत्‍वपूर्ण चट्टानी संरचनाओं के सूक्ष्‍म भू-कालक्रम; भू पृष्‍ठ विकास की बाधाओं और आर्थिक भू-विज्ञान को जानना।
  2. जरकॉन और अल्‍ट्रामैफिक - मैफिक चट्टानों में एचएफ समस्‍थानिक संरचना और भूपृष्‍ठ –मैंटल संबंध पर इसके प्रभाव तथा इंडियन शील्‍ड के 3.5 बिलियन वर्ष से अधिक के भूवैज्ञानिक इतिहास में विकास और क्षेत्रीय मैटेलोजेनी के बारे में जानना।
  3. कार्ल्‍सबर्ग और मध्‍य भारतीय रिज सिस्‍टम्‍स और अंडमान बैक आर्क बेसिन की मैफिक-अल्‍ट्रामैफिक चट्टानों का एसआर,एनडी,पीबी, और एचएफ- समस्‍थानिक चरित्र-चित्रण करना और इंडियन प्‍लेट मार्जिन्‍स में मैग्‍माकरण और भूगतिज प्रक्रियाओं को समझना।
  4. महासागर तलछट, विविक्‍त और जल : वर्तमान और भूतकाल की जलवायु पर प्रभाव और सतही प्रक्रियाएं।
  5. भारतीय हीरे वाली किम्‍बरलाइट चट्टानों में मैंटल जीनोलिथ्‍स चट्टान का भू-कालक्रम और समस्‍थनिक व्‍यवस्‍था : गहन मैंटल और हीरा अन्‍वेषण संबंधी जानकारी।
  6. भारतीय बेस धातु निक्षेपों  के जेनेटिक नियंत्रण को समझने के लिए एफई, सीआर, सीयू, और जेडएन जैसे तत्‍वों की समस्‍थानिक संरचना।
  7. जैव-भू-रसायनिक प्रक्रियाओं और पुरा जलवायु पर प्रभाव सहित एफई समस्‍थानिक अध्‍ययन प्रारंभ करना।

ख) प्रतिभागी संस्‍थाएं:

  1. राष्‍ट्रीय अंटाकर्टिक और समुद्री अनुसंधान केंद्र, गोवा
  2. राष्‍ट्रीय भूकंप-विज्ञान केंद्र

ग)कार्यान्‍वयन योजना :

  1. उपकरण और सहायक उपकरणों के विनिर्देशन को अंतिम रूप देना।
  2. वैश्विक निविदाएं आमंत्रित करना और उत्तर का मूल्‍यांकन करना।
  3. विक्रेता का चयन करना और आर्डर देना।
  4. मुख्‍य कार्मिकों का अभिनिर्धारण और वै‍ज्ञानिकों को प्रशिक्षण देना।
  5. उपकरण रखने के सिविल संरचना का निर्माण करना, बीएआरसी इत्‍यदि से अनुमोदन प्राप्‍त करना, एचआर-एसआईएमएस को आरंभ करना।
  6. मानकों के अनुसार परीक्षण करना।

घ) वितरण योग्‍य :

  1. भौमेतर वस्‍तुओं (उल्‍कापिंडों और अंतर-ग्रहीय धूलि, विकसित मंगल उल्‍कापिंड और अपेक्षाकृत अविकसित चंद्र उल्‍कपिंड इत्‍यदि) के विशेषता वर्णन उद्भव और विकास से संबंधित नवीनतम विज्ञान का विकास।
  2. उत्‍खनन सामग्री जैसे अल्‍ट्रामैफिक चट्टानों और चट्टानों में जीनोलिय (जैसे किम्‍बरलाइट) के समस्‍थानिक और ट्रेस तत्‍वों की विशेषता द्वारा पृथ्‍वी की आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी प्राप्‍त होगी। 
  3. गहन पृथ्‍वी प्रक्रियाओं का आकलन।
  4. विषमताओं के स्‍वस्‍थाने सूक्ष्‍म विशेषता वर्णन सहित समस्‍थानिक और भू रासायनिक विशेषता वर्णन का विशेषकर हिमालय में हिम मंडल विकास से संबंध स्‍थापित किया जाएगा ताकि उत्‍थान और विवर्वानिकी बनाम अवसादीकरण और पुरा-मानसून पर डेटा प्राप्‍त किया जा सके।
  5. एसआर, एनडी, पीबी, एचएफ इत्‍य‍ादि के समस्‍थानिक विशेषता-वर्णन से इंडियन प्‍लेट मार्जिन में मैग्‍माकरण और भूगतिज प्रक्रियाओं की समझ पर निर्णायक डेटा प्राप्‍त होगा और यह अंडमान-निकोबार सबडक्‍शन जोन और अन्‍य समान क्षेत्रों की संरचना के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।
  6. यह सुविधा केंद्र खनिज निक्षेपों के आनुवांशिक पहलुओं के अध्‍ययन में सहायता करेगा और अन्‍वेषण कार्य नीतियों हेतु नए आयाम प्रस्‍तुत करेगा।

ङ) बजट की आवश्‍यकता : 115 करोड़

(करोड़ रु.)

बजट
योजना का नाम 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 कुल
एचआर-एसआईएमएस 15.00 40.00 30.00 20.00 10.00 115.00;

 

Last Updated On 06/02/2015 - 12:14
Back to Top