क्रायोस्फियर महासागर के बाद जलवायु प्रणाली का दूसरा सबसे बड़ा घटक है, जिसमें दुनिया के मीठे पानी का लगभग 75 प्रतिशत भंडारित होता है। बर्फ के द्रव्यमान के संदर्भ में और इसकी ताप दक्षता को देखते हुए यह वैश्विक जलवायु में एक उल्लेखनीय भूमिका निभाता है। हिमालय ध्रुवीय क्षेत्र के बाहर बर्फ से ढके हुए क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण घनापन बनाता है। हिमालय के हिमनद जारी तापन के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। भारतीय हिमालय (जीएसआई, एसएसी) की विस्तृत हिमनद सूची में हिमालय में 9579 हिमनदों की उपस्थिति का संकेत मिलता है, जिनमें से कुछ प्रमुख नदियों के बहुवार्षिक स्रोत हैं। हिमनदों में होने वाले बदलाव क्षेत्रीय जलवायु के परिवर्तनों के सबसे स्पष्ट संकेतों में से एक हैं, चूंकि ये जमाव (बर्फबारी से) और पृथक्करण (बर्फ पिघलने से) नियंत्रित होते हैं। इनके जमाव या पृथक्करण या द्रव्यमान संतुलन हिमनद के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हिमनद अध्ययनों में द्रव्यमान संतुलन, जीपीआर रूपरेखा, बर्फ आवरण आकलन शामिल हैं जिसे समय की पर्याप्त अवधि में करने से हिमनदों के स्वास्थ्य को प्रकट किया जाएगा। हिमनद पिघलने से बनने वाली नदियां और उनके बहाव जल विज्ञान प्रणाली को महत्वपूर्ण फीडबैक देंगे।
(करोड़ रु. में)
| योजना का नाम | 2012-13 | 2013-14 | 2014-15 | 2015-16 | 2016-17 | कुल |
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| हिमालय में क्रायोस्फियर अध्ययन | 20.00 | 15.00 | 15.00 | 10.00 | 10.00 | 70.00 |
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Last Updated On 02/17/2015 - 13:08 |