जलवायु परिवर्तन विज्ञान

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वैश्‍विक तथा क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के तहत आवश्‍यक जनशक्‍ति, कम्‍प्‍यूटिंग, भौतिक संरचना के साथ स्‍वास्‍थ्‍य, कृषि तथा जल जैसे क्षेत्रों पर प्रभावों सहित विभिन्‍न वैज्ञानिक मुद्दों पर ध्‍यान देने के लिए आईआईटीएम, पुणे में एक समर्पित जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केन्‍द्र (सीसीसीआर) की स्‍थापना की गई है। जलवायु परिवर्तन अनुसंधान के प्रमुख प्रयासों में शामिल है:

  1. 2 डिग्री और 1 ° ग्रिड पैमाने वाले युग्मित समुद्री वायुमंडलीय वातावरण मॉडल में सीएफएस मॉडल के 100 साल वाले सिमुलेशन के दो सेट का उत्पादन किया गया है। भारतीय ग्रीष्‍म  मानसून की परिवर्तनशीलता का पूर्वानुमान देने के लिए इन अनुरुपण का उपयोग सीएफएस मॉडल उपयोगिता परीक्षण करने हेतु किया जा रहा है
  2. वर्ष 1981-2009  के दौरान लगातार 1 मई से 31 अक्टूबर तक डेटा क्षेत्र चलाने के लिए सीएफएस मॉडल से 29 वर्षों की अवधि में हिन्द-कास्‍ट मोड में एक वार्षिक ऋतुकालिक मानसून अनुरुपण प्रयोग शुरू किया गया है।
  3. लगातार आठ महीने की अवधि के लिए (मार्च-अक्टूबर, 2010) 1 दिवसीय डेटा क्षेत्र के साथ पूर्वानुमान मोड प्रयोगात्मक रन शुरू किए जा रहे हैं। दीर्घ अवधि पूर्वानुमान (एलआरएफ) सांख्यिकीय मॉडलों के साथ मानसून वर्षा के युग्मित-मॉडल आउटपुट के साथ तुलना की जा रही हैं।
  4. जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) द्वारा तैयार की गई आकलन रिपोर्ट (एआर 5) में योगदान करने के लिए एक केन्‍द्रित तथा भली भांति परिभषित रोमैप तैयार किया जा रहा है।

हैडली केन्द्र युग्मित महासागर-वायुमंडलीय जलवायु मॉडल संस्करण 3 (हैड सेमी 3) की जांच की जा रही है ताकि 17 के बीच, संभावित एनसेंबल सदस्य क्षेत्रों का चयन किया जा सके जो कि बहुत निकटता से प्रेक्षित ग्रीष्‍म मानसून जलवायु परिवर्तनों को पुननिर्मित करते है। क्‍यूयूएमपी परीक्षण के दौरान 17 एनसेंबल में से छह को विश्‍वसनीय रूप से औसत ग्रीष्‍म मानसून जलवायु को पुननिर्मित करने वाला पाया गया है और इन फील्‍डों का उपयोग क्षेत्रीय जलवायु मॉडल (आरसीएस)-प्रिसाइस को ड्राइव करने के लिए किया जाता है ताकि 1961-2100 की अवधि के लिए दक्षिण एशिया पर निरंतर ए 1 बी परिदृश्‍य (मध्‍यम उत्‍सर्जन) के तहत 50 कि. ग्रिड स्‍केल को सृजित किया जा सके।

जलवायु परिवर्तन आकलन के भारतीय नेटवर्क (आईएनसीसीए) के तत्वावधान में, नवंबर, 2010 के दौरान सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन और भारत : एक 4x4 आकलन - 2030 में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का क्षेत्रगत और क्षेत्रीय आकलन पर एक रिपोर्ट जारी की गई । देश के चार जलवायु संवेदनशील क्षेत्रों यथा हिमालयी क्षेत्र, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर क्षेत्र, तटीय क्षेत्र, में अध्‍ययन शुरू किया गया है तथा भारत में सृजित आर सी एम फील्‍डों का उपयोग करते हुए चार क्षेत्रों अर्थात कृषि, जल, वर्षावन और स्वास्थ्य में मूल्यांकन प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।

Last Updated On 11/02/2015 - 16:59
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