वायुमंडलीय मॉडलिंग और अनुसंधान

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डेटा एकीकरण और कंप्यूटिंग सुविधाएं : एक संपूर्ण पूर्वानुमान प्रणाली, जिसमें विभिन्न प्रेक्षण प्रणालियों से प्राप्त डेटा का अधिग्रहण, केंद्रीय डेटा प्रसंस्‍करण प्रणाली से लिंक, संख्‍यात्‍मक मॉडल में इसका उपयोग है, देश भर में सभी पूर्वानुमानकर्ताओं के लिए अत्याधुनिक आईटी आधारित वातावरण प्रदान करना शामिल है, को स्थापित किया गया है। इसमें सभी प्रेक्षणों का एकीकरण शामिल है और उन्‍हें उचित दृश्य करण के साथ मॉडल आउटपुटों और सिनॉप्‍टिक चार्टों पर अधिव्‍याप्‍ति और वास्‍तविक प्रयोक्‍ताओं के लिए अनुकूलित मौसम के पूर्वानुमान का प्रसारण शामिल है।

आईएमडी के आधुनिकीकरण के प्रथम चरण के दौरान,  इन अत्याधुनिक प्रेक्षण प्रणालियों को चालू करने के साथ-साथ अनुप्रयोग मॉड्यूल "सिनर्जी" को पूरे भारत में 34 पूर्वानुमान कार्यालयों में स्थापित किया गया है। इसमें एक दूसरे पर उपरिशायी अवलोकन और पूर्वानुमान की कई परतों की कल्पना करने की क्षमता है, इस प्रकार यह पूर्वानुमानकर्त्ता को मौसम पूर्वानुमान जारी करने से पूर्व जानकारी को टेराबाइट्स में सम्‍मिश्रित करने के लिए क्षमता उपलब्ध कराता है। एक सार्वजनिक मौसम सेवा प्रणाली (पीडब्‍ल्‍यूएस) 'मीटियो फैक्ट्ररी' विजुअल और प्रिंट मीडिया अर्थात, अखबारों, टीवी, किसानों, शिपिंग, आदि के लिए उत्पादों के स्वचालित वितरण के लिए आवश्यक कस्‍टमाइज प्रस्तुति सृजित करने हेतु पूर्वानुमानकर्त्‍ता को सक्षम बनाती है। एक सुपर कंप्यूटर के साथ केन्द्रीय सूचना प्रसंसाधन प्रणाली (सीआईपीएस) से प्रयोक्‍ता समुदाय को पूर्णत कस्‍टमाइज सेवाएं उपलब्‍ध करवाने के लिए एकीकृत सूचना प्रोसेसिंग सिस्‍टम के लिए प्रेक्षण नेर्टवर्क प्रबंधन में बदलाव किया गया है। यह अत्याधुनिक हार्डवेयर सुसज्जित है और इसमें हैंडलिंग, प्रबंधन, भंडारण, प्रसंस्‍करण के लिए सॉफ्टवेयर और परिचालन मौसम पूर्वानुमान में उपयोग किए जाने वाले सभी डेटा पूर्वानुमान उत्पादों को अभिलेखित किया गया है। ये हैं डेटा अधिग्रहण, डेटा नीति प्रबंधन, डेटा सेंटर, नीति प्रबंधन, कार्य केंद्र, बैकअप नीति प्रबंधन जैसी सात उप-प्रणालियां को मिलाकर बना हैं। सीआईपीएस डेटा केन्द्र भविष्य के लिए वर्तमान मौसम और पूर्वानुमान के आकलन के संबंध में उपग्रह रडार, आदि से प्राप्‍त मौसम वैज्ञानिक डेटा को किसी भी तरह ग्रहण करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है।

मौसम और समुद्र स्‍थिति पूर्वानुमान सेवाओं के लिए वैश्विक डेटा प्रोसेसिंग, सम्‍मिश्रण करने और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एनडब्‍ल्‍यूपी) देने के लिए इंकॉइस, आईआईटीएम, आईएमडी, और एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ में प्रत्येक में चार उच्च कार्य निष्पादन कम्प्यूटिंग सिस्टम का एक सेट (एचपीसीएस), स्थापित कर दिया गया है। ईएसएसओ में एचपीसीएस की संयुक्त शक्ति लगभग 125 टेरा फ्लॉपस है, जिससे युग्मित वायुमंडलीय समुद्री मॉडलिंग की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। आधुनिक सर्वर 10 केन्द्रों पर, अर्थात् आरएमसी दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, एम सी चंडीगढ़, अहमदाबाद, नागपुर, भुवनेश्वर, बंगलौर और हैदराबाद में चालू किए गए।

मौसम मॉडलिंग फ्रेमवर्क: एचपीसी को चालू करने के साथ ही, आईएमडी में अग्रिम 7 दिनों तक के लिए वैश्विक स्तर पर पूर्वानुमान के सृजन के लिए वैश्विक डेटा सम्‍मिश्रण हेतु ग्रिड बिंदु सांख्‍यिकीय इंटरपोलेशन (जीएसआई) स्‍कीम को शामिल करते हुए 35 किमी के स्थानिक विभेदन के साथ वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली (जीएफएस  टी382 / एल64) को प्रचालनात्‍मक बना दिया गया है। एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ में, विभेदन में वृद्धि, भौतिक प्रक्रियाओं में सुधार, डेटा सम्‍मिश्रण, उपग्रह तथा डीडब्‍ल्‍यूआर डेटा का इष्‍टमीकरण,  भूमि, समुद्र और वातावरण युग्‍मन, व्यापक सत्यापन और वैधीकरण के साथ-साथ एनसेबल पूर्वानुमान द्वारा पूर्वानुमान की सटीकता और विश्‍वसनीयता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। उपग्रह से सीधे प्राप्‍त विकिरण के सम्‍मिश्रण के साथ वैश्‍विक पूर्वानुमान प्रणाली के क्षैतिज विभेदन को टी 254 एल 64 (50 किमी) से बढ़ाकर टी 382 एल 64 (~33 किमी) किया गया  जिसे  बाद में आईएमडी में प्रचालानात्‍मक  बनाया गया।  उच्च विभेदन मॉडलों (टी 574 एल 64  (22) जीएफएस तथा एकीकृत मॉडलों  (4 डी वीएआर सम्‍मिश्रण के साथ(एन512एल70(25किमी)  का प्रयोगात्मक परीक्षण जारी है ।  इसके  व्यापक मूल्यांकन और सत्यापन अध्ययन के बाद उच्च विभेदन प्रणाली को प्रचालनात्‍मक बनाने की योजना बनाई गई  है ।

जीएफएस टी 382/एल 64 प्रणाली से प्रारंभिक तथा सीमा स्‍थितियों का उपयोग करते हुए, अग्रिम तीन दिनों के लिए 27 किमी, 9 किमी तथा 3 किमी के क्षैतिज विभेदनों पर पूर्वानुमान देने के लिए 3 डीवीएआर डेटा सम्‍मिश्रण के साथ मैसो स्‍केल पूर्वानुमान डब्‍ल्‍यूआरएफ (एआरडब्‍ल्‍यू) को दिन में दो बार परिचालित किया गया। जैसे कि ऊपर उल्‍लेख किया गया है, क्षेत्रीय केंद्रों में, उच्च विभेदन क्षेत्रीय पैमाने पर पूर्वानुमान प्राप्‍त करने के लिए काफी-उच्च विभेदन मेसोस्केल मॉडलों (डब्‍ल्‍यूआरएफ 3 कि मी के विभेदन पर) को परिचालित किया गया है। चक्रवात चेतावनी सेवा में सुधार करने हेतु एनडब्‍ल्‍यूपी  आधारित पूर्वानुमान उत्पादों का विशेष रुप से कस्‍टमाइजेशन किया गया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली के लिए स्‍थान विशिष्‍ट समय पैमाने पर मौसम पूर्वानुमान सृजित करने के लिए डॉप्‍लर मौसम और मेसोस्केल डब्‍ल्‍यूआरएफ मॉडल - आधारित नो कॉस्‍ट प्रणाली को विशेष रूप से शुरू किया गया । क्षेत्रीय पैमाने पर डेटा सम्‍मिश्रण को सृजित करने के लिए डब्‍ल्‍यूआरएफ मॉडल के लिए प्रायोगिक आधार पर 4डी वीएआर का उपयोग करते हुए वैश्विक मॉडल का सम्‍मिश्रण किया जा रहा है।

प्रारंभिक स्थितियों, मॉडल गतिशीलता और मॉडल भौतिकी में अनिशिचतताओं का ध्‍यान रखते हुए मानसून ऋतु के दौरान वर्षा के पूर्वानुमान प्रदान करने के लिए मल्टी मॉडल एनसेंबल (एमएमई) पूर्वानुमान परियोजना को विकसित किया गया है। ग्रीष्‍म्‍ मानसून अवधि के लिए  भारत और भारत के बाहर के 4 वैश्विक मॉडल अर्थात एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ, एनसीईपी, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूकेएमओ, ब्रिटेन और जेएमए, जापान से वर्षा पूर्वानुमान डेटा  का उपयोग एमएमई एल्गोरिथ्म गुणांकों को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया। भारतीय क्षेत्र के लिए वास्तविक समय में प्रचालन उपयोग के लिए लघु तथा मध्‍यम अवधि में वर्षा के एमएमई पूर्वानुमान उपलब्ध कराए गए । मौजूदा पंचवर्षीय योजना के दौरान एमएमई प्रणाली पर आधारित जिला स्तरीय मात्रात्मक पांच दिनों के मौसम के पूर्वानुमानों को भारत के जिला पैमाने कृषि मौसम पराशर्मी सेवा (एएएस) के प्रतिपादन हेतु सृजित किया जा रहा है।

अंटार्कटिका के मैत्री क्षेत्र के लिए दिन-प्रतिदिन लघु अवधि (48 घंटे) मौसम पूर्वानुमान प्रदान करने के लिए ध्रुवीय डब्‍ल्‍यूआरएफ को कार्यान्‍वित किया गया है। इन सभी एनडब्‍ल्‍यूपी उत्पादों को नियमित रूप से अंटार्कटिक अभियान के समर्थन में आईएमडी वेबसाइट (www.imd.gov.in) पर उपलब्ध कराया जाता है । प्रथम  दक्षिणी ध्रुव अभियान के समर्थन में एनसीएमआरडब्‍ल्‍यूएफ नियमित रूप से अपने क्षेत्रीय और वैश्विक विश्लेषण से एनडब्‍ल्‍यूपी मार्गदर्शन तथा पूर्वानुमान उत्पादों प्रदान कर रहा है ।

आईआईटीएम में युग्मित समुद्र-भूमि वायुमंडल मॉडल पर आधारित एक नई अत्याधुनिक जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (सीएफएस), स्थापित की गई थी और ऋतुकालिक समय पर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा के पूर्वानमुान हेतु मॉडल कौशल का परीक्षण करने के लिए कई संवेदनशीलता प्रयोग किए गए थे। इसके अलावा, मॉडल क्षैतिज विभेदन में टी62 (~ 200 कि. मी.) से टी126 (~ 110 किमी) वृद्धि हुई है जिससे भारत में मानसून वर्षा का बेहतर स्थानिक वितरण प्राप्‍त हुआ। इस प्रयास से मार्च 2010 से ही, भारतीय ग्रीष्‍म मानसून ऋतुकालिक मध्‍यम वर्षा और इसके वितरण के प्रायोगिक पूर्वानुमान आकलन उपलब्‍ध करवाने हेतु युग्‍मित मॉडल फ्रेमवर्क का उपयोग किया गया है । आईआईटीएम के साथ सहयोग के माध्यम से आईएमडी में भारतीय ग्रीष्‍म मानसून के सक्रिय/विराम अवधि की भविष्यवाणी को कार्यान्वित किया गया है ।

बीएआरसी के चार परमाणु स्थलों अर्थात् ट्रॉम्बे, कलपक्कम, कैगा और नरोरा के लिए 9 कि मी विभेदन पर ऑफ साइट न्यूक्लियर इमरजेंसी के लिए उनकी भारतीय वास्‍तविक समय ऑनलाइन निर्णय समर्थन प्रणाली (आईआरओडीओएस)  हेतु  मेसोस्केल मॉडल डब्‍ल्‍यूआरएफ से प्राप्‍त संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एनडब्‍ल्‍यूपी) उत्पादों की आपूर्ति की गई ।

Last Updated On 11/19/2015 - 16:03
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