अंटार्कटिक अभियान

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वर्ष 2007-11 के दौरान अंटार्कटिका के लिए चार भारतीय वैज्ञानिक अभियान (27-30) सफलतापूर्वक पूरे किए गए, जबकि अक्टूबर-नवंबर 2011 के दौरान अगला (31) अभियान आरंभ करने की योजना है। 2007 -11 की शीत और ग्रीष्‍म ऋतु के दौरान , अभियान के लिए महत्‍वपूर्ण संभार तंत्र कार्यों के अलावा, पृथ्वी विज्ञान, हिमनद विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, जीव विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, इंजीनियरिंग और संचार के क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं में वैज्ञानिक डेटा संग्रहित किए गए ।

अंटार्कटिका में किए गए कार्यों में से कुछ मुख्य इस प्रकार हैं:

  • मैत्री स्टेशन पर दो विषम डेल्टा एंटेना के साथ एक डिजिटल आयनोसोंडे सिस्टम अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं के दौरान उच्च और निम्न अक्षांश के बीच आयनोस्‍फेरिक क्षेत्र और मेग्‍नेटो स्‍फेरिक - आयनोस्‍फेरिक क्षेत्र युग्मन की छोटी और लंबी अवधि की परिवर्तनीयता का अध्ययन करने के लिए स्थापित किया गया।
  • पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन की निगरानी के लिए मैत्री स्टेशन पर एक चुंबकीय वेधशाला संचालित की गई थी। तूफान-उप तूफान संबंध, वायुमंडलीय इलेक्‍ट्रिकल पैरामीटरों में वैश्विक हस्ताक्षर, विशेष रूप से अंटार्कटिका महाद्वीप पर, दक्षिणी गोलार्द्ध में देखे गए कुल चुंबकीय क्षेत्र 'एफ' में गिरावट; आयनोस्‍फेरिक क्षेत्र टीईसी, जगमगाहट और क्षोभ मंडलीय जल वाष्प सामग्री को समझने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन की निगरानी पर विचार किया गया था।
  • नार्वे स्टेशन ट्रोल (एस अक्षांश 720 0 '7 "और ई लांग। 20 32' 2") का आधार के रूप में उपयोग करते हुए जेल्‍स्विफजेला में 20 से 30 पूर्वी देशांतर के बीच भूवैज्ञानिक मानचित्रण किया गया । दो नक्शे "ओर्विन रेंज, सीडीएमएल, पूर्वी अंटार्कटिका के भूवैज्ञानिक नक्शे" और "श्रीमार्चर ओएसिस, पूर्वी अंटार्कटिका के भूआकारिकी नक्शे" प्रकाशित किए गए थे।
  • तटीय अंटार्कटिका में ताजा हिम नमूनों पर किए गए सूक्ष्मजीवविज्ञानी अध्ययनों से इस क्षेत्र में हवा-हिम जैव भू रासायनिक चक्र में जीवाणुओं की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में पता चलता है। तटीय लार्समेन हिल्स, पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फ के हिमनद रासायनिक और सूक्ष्मजीवविज्ञानी अध्ययन से पता चलता है कि हिम कैप बर्फ में पोषकों सांद्रता में वृद्धि बर्फ में प्रेक्षित उच्‍च ब्रॉमाइड सांद्रता के लिए जिम्‍मेदार है जिसे बर्फ में सूक्ष्‍म शैवाल के विकास में वृद्धि तथा तदनुसार ब्रोमो-कॉर्बनस के उत्‍पादन से जोड़ा जा सकता है। 2008-2011 के दौरान ध्रुवीय क्षेत्र से बैक्टीरिया की बारह नई प्रजातियों की सूचना मिली। दो जीन अर्थात् टी-आरएनए संशोधित जीटीपीएएसई और एस्पार्टेट अमीनो ट्रांस्फ़्रेज़ की कम तापमान पर बैक्टीरिया के अस्तित्व वाले जीन के रूप में पहचान की गई। लाइपेस की संख्या और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए कम तापमान पर सक्रिय और उपयोगी प्रोटिएजों की भी पहचान की गई।
  • श्रीमार्चर मरुद्वीप, केन्‍द्रीय ड्रॉनिंग मॉडलैड (सीडीएमएल)के आस-पास भू-हिम-समुद्र (एलआईएस) इंटरफेस (हिंज लाइन) का सीमांकन किया गया।
  • श्रीमार्चर मरुद्वीप के झील तलछटों में तलछट वैज्ञानिक, पेलनोलॉजिकल तथा भू रासायनिक प्राक्‍सी संकेतकों का उपयोग करते हुए पूर्वी अंटार्कटिक में गत चर्तुथाधिक जलवायु परिस्‍थितियों को समझने के लिए एक प्रमुख बहु विधात्‍मक अध्‍ययन प्रारंभ किया गया। मात्रा संतुलन अध्‍ययन हेतु लार्समेन पर्वत के लिए उपग्रह आधारित डीईएम सृजित किया गया। 
Last Updated On 11/18/2015 - 12:52
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